संस्था का इतिहास

आज से 17 वर्ष पूर्व, 5 सितंबर 2007 को, शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर, एक छोटे से घर से श्री नरेश ढल्ल द्वारा एक बड़े उद्देश्य के साथ MTFC की स्थापना की गई। यह संस्था केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचार, एक भावना और एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत थी — जिसका लक्ष्य था उन मासूम, गरीब और जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुँचाना, जिनके जीवन में सीखने के अवसर लगभग न के बराबर थे। प्रारंभ में कुछ ही बच्चों से शुरू हुई यह यात्रा धीरे-धीरे आकार लेती गई। संस्था के स्वयंसेवकों ने बिना किसी संसाधन के, अपने सीमित साधनों में रहकर बच्चों को पढ़ाना, उन्हें स्कूल से जोड़ना और उनके अंदर आत्मविश्वास जगाना शुरू किया। अब तक 4235 से अधिक बच्चों को MTFC द्वारा विभिन्न माध्यमों से शिक्षा, संस्कार, पोषण और नैतिक मूल्यों की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया जा चुका है। इनमें से सैकड़ों बच्चे आगे चलकर न केवल शिक्षित हुए, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव लेकर स्वयं संस्था से जुड़ गए। MTFC का सबसे बड़ा गौरव यह है कि जिन बच्चों को कभी यहाँ शिक्षा दी गई, वही बच्चे आज संस्था की रीढ़ बन चुके हैं। उनमें से अधिकांश बेटियाँ हैं — जिन्होंने अपनी लगन, मेहनत और तपस्या के बल पर न केवल स्वयं को ऊँचाइयों तक पहुँचाया, बल्कि अन्य बच्चों के जीवन में भी उजाला फैलाया। ये बेटियाँ आज शिक्षिका, समाजसेविका, डॉक्टर, नर्स, और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत होकर उस विश्वास को साकार कर रही हैं, जिससे एमटीएफसी की नींव रखी गई थी। संस्था का यह अटूट सफर किसी चमत्कार से कम नहीं। बिना किसी सरकारी सहायता के, केवल मानवीय संवेदना, सेवा-भाव और समर्पण की शक्ति से इस संस्था ने जो पहचान बनाई है, वह असंख्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है। MTFC का अस्तित्व उन्हीं लोगों की बदौलत है, जिन्होंने अपने जीवन के अनमोल वर्ष समाज को समर्पित कर दिए। उनकी निष्ठा, ईमानदारी और बच्चों के प्रति अटूट प्रेम ने इस संस्था को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज एमटीएफसी एक परिवार की तरह है — जहाँ हर स्वयंसेवक, हर बच्चा, और हर समर्थक एक साझा मिशन का हिस्सा
संस्था का मुख्य उद्देश्य

संस्था का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ अज्ञानता और अनपढ़ता के लिए कोई स्थान न हो। हमारा विश्वास है कि शिक्षा ही वह एकमात्र साधन है जिसके द्वारा बच्चों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाया जा सकता है। मासूम और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और प्राथमिकता है। यदि ये बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, तो वे अनजाने में समाज के लिए बड़े विघटनकारी तत्व बन सकते हैं। बिना शिक्षा के जीवन उन्हें नशे, चोरी, लूटपाट और असामाजिक गतिविधियों की ओर धकेल सकता है, जिससे न केवल उनका अपना भविष्य नष्ट होता है, बल्कि दूसरों के जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में वे स्वयं भी दुखी रहते हैं और समाज के लिए भी बोझ बन जाते हैं। इसके विपरीत, जब यही बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं, तो उनमें न केवल अपने जीवन को सँवारने की क्षमता विकसित होती है, बल्कि वे समाज के लिए बहुमूल्य संपत्ति बन जाते हैं। शिक्षित होकर वे आत्मनिर्भर बनते हैं, सही और गलत में अंतर करना सीखते हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान देते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में देश के विकास में भी भागीदार बनते हैं। शिक्षा से सुसज्जित ये बच्चे आने वाले कल के डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक, लेखक और नेता बन सकते हैं। यह संस्था इस विश्वास के साथ कार्य कर रही है कि हर बच्चा, चाहे वह कितना ही गरीब या असहाय क्यों न हो, यदि उसे सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वह अपने जीवन को ऊँचाइयों तक ले जा सकता है और पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है।
